भारतीय लोकतंत्र में क्षेत्रीय दलों की भूमिका और प्रभाव

Indian Journal of Multidisciplinary Research and Studies

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A National Peer-reviewed, Multidisciplinary, Quarterly Journal

ISSN: 3108-1681

Call For Paper - Volume - 2 Issue - 2 (April - June 2026)
Article Title

भारतीय लोकतंत्र में क्षेत्रीय दलों की भूमिका और प्रभाव

Author(s) अभिषेक मिश्रा.
Country India
Abstract

भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विविधता है भाषाई, सांस्कृतिक, सामाजिक और भौगोलिक। इसी विविधता ने भारतीय राजनीति को बहुरंगी स्वरूप प्रदान किया है। स्वतंत्रता के बाद प्रारंभिक वर्षों में भारतीय राजनीति पर राष्ट्रीय दलों, विशेषकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, का प्रभुत्व रहा, किन्तु समय के साथ क्षेत्रीय चेतना, भाषाई अस्मिता, आर्थिक असमानता और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के प्रश्नों ने क्षेत्रीय दलों को जन्म दिया। आज क्षेत्रीय दल न केवल राज्यीय राजनीति में बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। वे नीतिनिर्माण, सत्ता-साझेदारी और संघीय ढाँचे के सुदृढ़ीकरण में महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं। हाल के वर्षों में गठबंधन राजनीति के दौर में क्षेत्रीय दलों का प्रभाव अत्यधिक बढ़ा है उन्होंने केंद्र की नीतियों को प्रभावित किया, राष्ट्रीय सरकारों को स्थायित्व या अस्थायित्व प्रदान किया, और स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाया। हालाँकि, क्षेत्रीय दलों पर जातिवाद, संकीर्णता और परिवारवाद के आरोप भी लगते रहे हैं। यह शोध-पत्र भारतीय लोकतंत्र में क्षेत्रीय दलों के उद्भव, विकास, भूमिका, प्रभाव और चुनौतियों का आलोचनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। इसके माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय लोकतंत्र की जीवंतता, बहुलता और सहअस्तित्व की भावना में क्षेत्रीय दलों की भूमिका अनिवार्य है।

Area Sociology
Issue Volume 1, Issue 2 (April - June 2025)
Published 2025/05/05
How to Cite Indian Journal of Multidisciplinary Research and Studies, 1(2), 31-34.

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